मध्यप्रदेश में क्यों बढ़ रहा कोरोना ? जाने बढ़ रहे संक्रमण का असली राज, क्या काम आएगी संक्रमण से बचने की 3T तकनीक ?

पराग श्रीवास्तव

दुनिया भर को अपने शिकंजे में लेने वाला कोरोना का नया वेरिएंट अब भारत में भी मौजूद है।  अब तक तकरीबन 30 देशों के 400 व्यक्ति इस नए वेरिएंट की चपेट में आ चुके हैं।  वही भारत में भी गुरुवार को ही इस वायरस की एंट्री हुई थी।  जिसमे दक्षिण अफ्रीका से लौटे 2 लोगों में संक्रमण की पुष्टि की गई थी। 
कोरोना के  ओमीक्रॉन वेरिएंट का प्रसार इतना तेज है की मात्र 10 दिनों में ही इसने लगभग 30 देशों में अपनी दस्तक दे दी है।  जिनमे अब भारत भी शामिल हो चुका है।  नए खतरे की आहट से  हमारे देश में कोरोना के मरीज भी एकाएक बढ़ने लगे हैं।  पिछले 24 घंटों में देश में कुल 8,603 नए मामले दर्ज हुए हैं, सबसे ज्यादा मामले केरल से दर्ज किये जा रहे हैं।  वही मध्यप्रदेश में भी कोरोना मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है।  
 

 
आखिर क्यों बढ़ने लगे मप्र में कोरोना के मरीज ?
कोरोना के नए वेरिएंट के आते ही मप्र में कोरोना के मामले बढ़ने लगे।  जबकि प्रदेश में अब तक कोई भी ओमीक्रॉन संक्रमित मरीज नहीं है। बीते 24 घंटों में प्रदेश में कुल 18 नए संक्रमित मिले हैं। जिनमे सबसे ज्यादा 8 केस राजधानी भोपाल से, 6 इंदौर में और 2-2 केस ग्वालियर-जबलपुर से दर्ज किये गए है।  इसके साथ ही मप्र में कुल संक्रमितों की संख्या 142 हो गई है।  
आज से ठीक 10-11 दिन पहले मप्र में हर रोज मात्र 7-8 मामले ही सामने आ रहे थे।  लेकिन अचानक से मरीजों की संख्या 20 के करीब पहुंच गई।  दरअसल, नए वेरिएंट के खतरे को देख मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश में टेस्टिंग को बढ़ाने के निर्देश दिए, जैसे ही कोरोना जाँच को बढ़ाया गया संक्रमितों की संख्या में अचानक वृद्धि देखने को मिलने लगी।  

आखिर कौन है जिम्मेदार 
मरीजों की संख्या में वृद्धि, यह साफ  खुलासा कर रही है कि MP से कोरोना गया ही नहीं था। बल्कि शहर में हमारे बीच ही रह रहा था।  मामलों में बड़े स्तर(देश व्यापी) पर कमी को देखते हुए लोगों की कोरोना जाँच में ढील दी गई।  रेलवे स्टेशनो, बस स्टैंड  पर भी टेस्टिंग बंद कर दी गई। जिससे नए मामलों में भी कमी आने लगी।  
 

 
कम जाँच = कम केस 
कोरोना की दूसरी लहर से प्रदेश में हालात सुधरने के साथ ही सरकार सहित लोगों ने भी इस ओर ढील देना मुनासिफ समझा। कोरोना के RT-PCR टेस्ट में भी रूचि लेना कम कर दी गई। 'कम जाँच = कम केस' का फार्मूला लगते ही प्रदेश में कोरोना मामले 10 के अंदर आने  लगे।  वही लोगों में भी खतरे को टलता देख लापरवाही देखी गई। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के प्रोटोकॉल भी भुला दिए गए।  जिससे महामारी एक बार फिर हमारे बीच पलने लगी।  वही सरकार ने भी मिशन 2023 की ओर अपना रुख कर लिया और समस्या को कुछ हद तक अपने हाल पर छोड़ दिया।  

नया  वेरिएंट आने से बढ़ने  लगे केस ?
कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रॉन की दुनिया में दस्तक को देख भारत भी सतर्क हुआ।  तमाम सावधानी बरतने के बाद भी संक्रमण भारत में प्रवेश कर गया।  विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस वेरिएंट को कोरोना के डेल्टा वेरिएंट से 10 गुना तेज और ताकतवर बताया है। खतरे को भांप मप्र सरकार अलर्ट हुई और टेस्टिंग सहित बाहर से आने वाले यात्रियों पर चौकसी बढ़ा दी गई।  यहाँ टेस्टिंग बढ़ी वहाँ मरीजों की संख्या बढ़ने लगी। इसके साथ ही ध्यान देने वाली बात यह है कि नए संक्रमित भोपाल,इंदौर,ग्वालियर और जबलपुर में ही मिल रहे है।  जिससे साफ जाहिर है प्रशासन महानगरों पर अपनी नजर गड़ाए बैठा है। 

क्या फिर से फैल जाएगा  कोरोना 
मध्यप्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या अभी बढ़ते ही जा रही है।  लेकिन शिवराज सरकार इस बार पूरी तरह अलर्ट है।  रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर यात्रियों की अवाजाही पर नजर रखी जा रही है।  इसके साथ ही टेस्टिंग और वैक्सिनेशन भी बढ़ा दी गई है।  स्वास्थ्य विभाग ने वैक्सीन का दूसरा डोज जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।   
 

 
सीएम शिवराज की 3-T रणनीति रोकेगी कोरोना ?
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बार कोरोना से जंग जीतने के लिए 3-T  तकनीक का मन्त्र दिया है।  3-T ,मतलब टेस्टिंग, ट्रैकिंग और ट्रीटमेंट की रणनीति।  जिसके तहत टेस्टिंग कर नए मरीज को ढूंढा जायेगा।  ट्रैकिंग कर संक्रमित पर नजर रखी जाएगी। अस्पताल में संक्रमित का तय वक्त पर ट्रीटमेंट किया जायेगा।  सरकार का मानना है कि इस  मंत्र से अबकी  बार कोरोना को फैलने से रोक लिया जायेगा।  

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