हबीबगंज स्टेशन का एक गोंड़ शासक के नाम पर नामकरण और PM मोदी का मप्र आगमन , क्या दे रहा है 2023 की रणनीति का बड़ा संकेत ?

Lokdesh Desk

 देश के दिल में लोगों के दिलों दिमाग को भा जाने वाला, एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं से सुसज्जित, हबीबगंज रेलवे स्टेशन बनकर तैयार है। लगभग 450 करोड़ रुपए की लागत से बना यह स्टेशन देश का पहला निजी स्टेशन होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज15 नवंबर को इस भव्य स्टेशन का उद्घाटन करेंगे। 

हबीबगंज स्टेशन को नया रूप तो मिला  ही, साथ ही उद्घाटन के 2 दिन पहले नया नाम भी मिल गया। भाजपा सरकार की नाम बदली करण नीति उत्तरप्रदेश से शुरू होकर मध्य प्रदेश तक जा पहुची और हबीबगंज को नया नाम दे गई। इस आलीशान रेलवे स्टेशन को अब रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के नाम से जाना जाएगा। नाम में परिवर्तन की गुजारिश राज्य सरकार  ने एक दिन पहले ही की, और केंद्र ने इसपर अपनी मुहर लगाने में देर नही की ।
वहीं मध्यप्रदेश सरकार 15 नवम्बर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती, जनजातीय गौरव दिवस के रुप मे मनाने जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। शिवराज सरकार इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में  आदिवासियों को शामिल कर रही है।
वही राजनैतिक पंडित PM के इस दौरे को सियासी मायनो से जोड़ रहे हैं। दरअसल मप्र एक जनजातीय प्रदेश है और प्रदेश की करीब 24% आबादी आदिवासियों से भरी है। कोरोना महामारी के चलते प्रदेश की आदिवासी जनसंख्या महँगाई की मार का सामना कर रही है। जिसके चलते जनजातीय समुदाय के एक बड़े तबके में सरकार के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। जिसका एक बड़ा सबूत रैगाव विधानसभा में बीजेपी की हार के रूप में देखा जा सकता हैं । खासकर भाजपा को उस गांव से भी हार का मुंह देखना पड़ा  जहाँ CM शिवराज ने आदिवासी महिला के घर भोजन किया था । हबीबगंज स्टेशन का नाम बदलकर गोंड रानी कमलापति के नाम पर किया गया है, इससे पहले भी भोपाल सांसद साध्वी प्रज्ञा ने हबीबगंज के नाम को पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेई के नाम पर रखें जाने की मांग की थी। लेकिन स्वीकार नही हुई। प्रधानमंत्री मोदी का जनजातीय गौरव दिवस पर आदिवासियों के लिए संबोधन और  एक गोंड शासक के नाम पर हबीबगंज स्टेशन का नामकरण, आने वाले 2023 विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का मास्टर स्ट्रॉक साबित हो सकता है। 

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